मेरी बरसों की उदासी का सिला कुछ तो मिले उस से कह दो वो मेरा क़र्ज़ चुकाने आए
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बंसी सब सुर त्यागे है, एक ही सुर में बाजे है हाल न पूछो मोहन का, सब कुछ राधे राधे है
Zubair Ali Tabish
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हम हैं ना! ये जो मुझ सेे कहते हैं ख़ुद किसी और के भरोसे हैं ज़िंदगी के लिए बताओ कुछ ख़ुद-कुशी के तो सौ तरीक़े हैं
Vikram Gaur Vairagi
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हम वो हैं जो ख़ुदा को भूल गए तुम मेरी जान किस गुमान में हो
Jaun Elia
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क्या ग़लत-फ़हमी में रह जाने का सदमा कुछ नहीं वो मुझे समझा तो सकता था कि ऐसा कुछ नहीं इश्क़ से बच कर भी बंदा कुछ नहीं होता मगर ये भी सच है इश्क़ में बंदे का बचता कुछ नहीं
Tehzeeb Hafi
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मर चुका है दिल मगर ज़िंदा हूँ मैं ज़हर जैसी कुछ दवाएँ चाहिए पूछते हैं आप आप अच्छे तो हैं जी मैं अच्छा हूँ दुआएँ चाहिए
Jaun Elia
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अपनी आँखों में 'क़मर' झाँक के कैसे देखूँ मुझ से देखे हुए मंज़र नहीं देखे जाते
Khalil Ur Rehman Qamar
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लफ़्ज़ कितने ही तेरे पैरों से लिपटे होंगे तू ने जब आख़िरी ख़त मेरा जलाया होगा तू ने जब फूल किताबों से निकाले होंगे देने वाला भी तुझे याद तो आया होगा
Khalil Ur Rehman Qamar
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एक चेहरे से उतरती हैं नक़ाबें कितनी लोग कितने हमें इक शख़्स में मिल जाते हैं
Khalil Ur Rehman Qamar
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मुझ से दामन न छुड़ा मुझ को बचा कर रख ले मुझ से इक रोज़ तुझे प्यार भी हो सकता है
Khalil Ur Rehman Qamar
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वक़्त बदलेगा तो इस बार मैं पूछूँगा उसे तुम बदलते हो तो क्यूँँ लोग बदल जाते हैं
Khalil Ur Rehman Qamar
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