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मेरी दीवानगी से वो ख़फ़ा था सफ़र में साथ छोड़ेगा पता था

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माना कि धागे पक्के हैं कच्चे नहीं कॉलेज के रिश्ते मगर टिकते नहीं ख़ूब-अच्छे से ये बात सुन ले हर कोई हम मुफ़्त मिल सकते हैं पर सस्ते नहीं

Aatish Indori

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यूँँ तो कोठियाँ हैं यहाँ बहुत मुझे फिर भी लोग मिले नहीं मैं समझ गया भले देर से बड़े शहर दिल के बड़े नहीं वो हमारे गाँव में आते थे बड़े शहर वाले वो लोग थे कभी फ़ोन उन का लगा नहीं कभी वो पते पे मिले नहीं

Aatish Indori

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सनद रहे सब को जल्लादों ने तक़रीरें कर दी हैं काफ़िर का जो सर काटेगा वो मोमिन कहलाएगा

Aatish Indori

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तिजोरी तो भरी लेकिन ठगाई भी की उस ने वफ़ा की ढेर लेकिन बेवफ़ाई भी की उस ने

Aatish Indori

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पहले जीभ में काँटा गाड़ा जाएगा बा'द में इत्मीनान से काटा जाएगा

Aatish Indori

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