मिलना तो ख़ैर उस को नसीबों की बात है देखे हुए भी उस को ज़माना गुज़र गया
Related Sher
अब इन जले हुए जिस्मों पे ख़ुद ही साया करो तुम्हें कहा था बता कर क़रीब आया करो मैं उस के बा'द महिनों उदास रहता हूँ मज़ाक में भी मुझे हाथ मत लगाया करो
Tehzeeb Hafi
295 likes
ये मुहब्बत की किताबें कौन यूँँ कब तक पढ़े कौन मारे रोज़ ही इक बात पे अपना ही मन
nakul kumar
87 likes
उस को फ़ुर्सत नहीं मिलती कि पलट कर देखे हम ही दीवाने हैं दीवाने बने रहते हैं
Waseem Barelvi
151 likes
हुई मुद्दत कि 'ग़ालिब' मर गया पर याद आता है वो हर इक बात पर कहना कि यूँँ होता तो क्या होता
Mirza Ghalib
149 likes
ख़ुश्बू की बरसात नहीं कर पाते हैं हम ख़ुद ही शुरुआत नहीं कर पाते हैं जिस लड़की की बातें करते हैं सब सेे उस लड़की से बात नहीं कर पाते हैं
Gyan Prakash Akul
83 likes
More from Adeem Hashmi
भूलती कब हैं भला पिछली रुतों की सोहबतें हंस बैठा ही रहा सूखे हुए तालाब पर
Adeem Hashmi
22 likes
इक खिलौना टूट जाएगा नया मिल जाएगा मैं नहीं तो कोई तुझ को दूसरा मिल जाएगा
Adeem Hashmi
37 likes
फ़ासले ऐसे भी होंगे ये कभी सोचा न था सामने बैठा था मेरे और वो मेरा न था
Adeem Hashmi
94 likes
बिछड़ के तुझ सेे न देखा गया किसी का मिलाप उड़ा दिए हैं परिंदे शजर पे बैठे हुए
Adeem Hashmi
41 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Adeem Hashmi.
Similar Moods
More moods that pair well with Adeem Hashmi's sher.







