मुहब्बत के अलावा अब ख़ुदा फिर कौन आएगा अब उस की इस जगह पर दूसरा फिर कौन आएगा अकेला हूँ अकेला था अकेला ही रहूँगा मैं मेरे ग़म में उदासी के सिवा फिर कौन आएगा
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ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
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ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
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पूछते हैं वो कि ग़ालिब कौन है कोई बतलाओ कि हम बतलाएँ क्या
Mirza Ghalib
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क्या ख़बर कौन था वो, और मेरा क्या लगता था जिस सेे मिल कर मुझे, हर शख़्स बुरा लगता था
Tehzeeb Hafi
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हम को दिल से भी निकाला गया फिर शहर से भी हम को पत्थर से भी मारा गया फिर ज़हरस भी
Azm Shakri
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साल को साल में ही रहने दो बस इसी जाल में ही रहने दो तीरगी शा'इरी अकेलापन मुझ को इस हाल में ही रहने दो
Manas Ank
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उसे तारीफ में दो शे'र कहता हूँ वो सुनके फिर मुझे ऐसे कहे कुछ भी
Manas Ank
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लड़कों को लगता था उन सेे मुहब्बत करती है वो तो बस उन सेे हर काम निकाला करती थी
Manas Ank
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निभाना मुश्किलों का है यहाँ पर मुहब्बत एक ज़िम्मेदारी होती
Manas Ank
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रफ़्ता रफ़्ता मुस्कुराना सीख लो दिल जो टूटा मुस्कुराना सीख लो बस उदासी इस क़दर सकते छुपा यार थोड़ा मुस्कुराना सीख लो
Manas Ank
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