मुझ को बीमार करेगी तिरी आदत इक दिन और फिर तुझ से भी अच्छा नहीं हो पाऊँगा
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दिन ढल गया और रात गुज़रने की आस में सूरज नदी में डूब गया, हम गिलास में
Rahat Indori
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तू मोहब्बत से कोई चाल तो चल हार जाने का हौसला है मुझे
Ahmad Faraz
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प्यार दो बार थोड़ी होता है हो तो फिर प्यार थोड़ी होता है यही बेहतर है तुम उसे रोको मुझ सेे इनकार थोड़ी होता है
Zubair Ali Tabish
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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एक आवाज़ कि जो मुझ को बचा लेती है ज़िन्दगी आख़री लम्हों में मना लेती है जिस पे मरती हो उसे मुड़ के नहीं देखती वो और जिसे मारना हो यार बना लेती है
Ali Zaryoun
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ये आशिक़ी तिरे बस की नहीं सो रहने दे कि तेरा काम तो बस ना-सिपास होना है
Rahul Jha
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अज़ल से मेरी हिफ़ाज़त का फ़र्ज़ है उन पर सभी दुखों को मेरे आस-पास होना है
Rahul Jha
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मैं आज सोग मनाना सिखाने वाला हूँ इधर को आएँ जिन्हें महव-ए-यास होना है
Rahul Jha
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कुछ इस अदास मोहब्बत-शनास होना है ख़ुशी के बाब में मुझ को उदास होना है
Rahul Jha
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मुझ में इतनी नहीं तासीर मसीहाई की ज़ख़्म भर सकता हूँ ईसा नहीं हो पाऊँगा
Rahul Jha
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