मुझे वो याद मेरा बचपना दिलाती है उछल उछल के वो बारिश में जब नहाती है मैं जिस के सिर्फ़ तसव्वुर से मुस्कुराता था अब उस की याद मुझे रात दिन रुलाती है
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माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूँ मैं तू मेरा शौक़ देख मिरा इंतिज़ार देख
Allama Iqbal
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शायद मुझे किसी से मोहब्बत नहीं हुई लेकिन यक़ीन सब को दिलाता रहा हूँ मैं
Jaun Elia
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बिछड़ कर उस का दिल लग भी गया तो क्या लगेगा वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या ना आऊँ मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हें अच्छा लगेगा
Tehzeeb Hafi
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दो गज़ सही मगर ये मेरी मिल्कियत तो है ऐ मौत तू ने मुझे ज़मींदार कर दिया
Rahat Indori
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बिठा दिया है सिपाही के दिल में डर उस ने तलाशी दी है दुपट्टा उतार कर उस ने मैं इस लिए भी उसे ख़ुद-कुशी से रोकता हूँ लिखा हुआ है मेरा नाम जिस्म पर उस ने
Zia Mazkoor
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मेरी आँखों से खूँ निकलता है और सीने में दिल उछलता है दिल बहलता नहीं है रोने से ख़ूब रोने से दिल बहलता है
Abid aseer
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आप से इक सवाल है मेरा आप इतने हसीन कैसे हो
Abid aseer
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जो कुछ है तिरे ग़म में हुआ क्यूँ नहीं सुनता ऐ शख़्स मिरे दिल की सदा क्यूँ नहीं सुनता ये सोच के रोता हूँ की रोने की सदाएँ इंसान तो सुनता है ख़ुदा क्यूँ नहीं सुनता
Abid aseer
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