मेरी आँखों से खूँ निकलता है और सीने में दिल उछलता है दिल बहलता नहीं है रोने से ख़ूब रोने से दिल बहलता है
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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हम ने उस को इतना देखा जितना देखा जा सकता था लेकिन फिर भी दो आँखों से कितना देखा जा सकता था
Farrukh Yar
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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बिछड़ कर उस का दिल लग भी गया तो क्या लगेगा वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या ना आऊँ मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हें अच्छा लगेगा
Tehzeeb Hafi
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मेहरबाँ हम पे हर इक रात हुआ करती थी आँख लगते ही मुलाक़ात हुआ करती थी हिज्र की रात है और आँख में आँसू भी नहीं ऐसे मौसम में तो बरसात हुआ करती थी
Ismail Raaz
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जो कुछ है तिरे ग़म में हुआ क्यूँ नहीं सुनता ऐ शख़्स मिरे दिल की सदा क्यूँ नहीं सुनता ये सोच के रोता हूँ की रोने की सदाएँ इंसान तो सुनता है ख़ुदा क्यूँ नहीं सुनता
Abid aseer
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आप से इक सवाल है मेरा आप इतने हसीन कैसे हो
Abid aseer
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मुझे वो याद मेरा बचपना दिलाती है उछल उछल के वो बारिश में जब नहाती है मैं जिस के सिर्फ़ तसव्वुर से मुस्कुराता था अब उस की याद मुझे रात दिन रुलाती है
Abid aseer
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