जो कुछ है तिरे ग़म में हुआ क्यूँ नहीं सुनता ऐ शख़्स मिरे दिल की सदा क्यूँ नहीं सुनता ये सोच के रोता हूँ की रोने की सदाएँ इंसान तो सुनता है ख़ुदा क्यूँ नहीं सुनता
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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मेरी आँखों से खूँ निकलता है और सीने में दिल उछलता है दिल बहलता नहीं है रोने से ख़ूब रोने से दिल बहलता है
Abid aseer
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आप से इक सवाल है मेरा आप इतने हसीन कैसे हो
Abid aseer
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मुझे वो याद मेरा बचपना दिलाती है उछल उछल के वो बारिश में जब नहाती है मैं जिस के सिर्फ़ तसव्वुर से मुस्कुराता था अब उस की याद मुझे रात दिन रुलाती है
Abid aseer
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