मुझे ये तक मुयस्सर है कि तुझ को छू भी सकता हूँ कई लोगों का तो सपना है तुझ को देखते रहना
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माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूँ मैं तू मेरा शौक़ देख मिरा इंतिज़ार देख
Allama Iqbal
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गुलाब ख़्वाब दवा ज़हर जाम क्या क्या है मैं आ गया हूँ बता इंतिज़ाम क्या क्या है
Rahat Indori
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तू मोहब्बत से कोई चाल तो चल हार जाने का हौसला है मुझे
Ahmad Faraz
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मैं ने उस सेे प्यार किया है मिल्किय्यत का दावा नइँ वो जिस के भी साथ है मैं उस को भी अपना मानता हूँ
Ali Zaryoun
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तुम्हारे नाम की हर लड़की से मिला हूँ मैं तुम्हारा नाम फ़क़त तुम पे अच्छा लगता है
Unknown
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होंठ जो कहते है सब कुछ झूठ है आँख सच कहती है उस की बात सुन
Siddharth Saaz
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हम लोग चूंकि दश्त के पाले हुए हैं सो ख़्वाबों में चाहे झील हों, आँखों में पेड़ हैं
Siddharth Saaz
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तन्हा कब तक बात करूँँगा मैं तू भी मुझ सेे बात किया कर दोस्त
Siddharth Saaz
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तमाम मस'अले उठाए फिर रहे हैं हम इसीलिए भी चलते चलते थक गए हैं हम थे कितने कम-नसीब हम कि राबता न था हैं कितने ख़ुशनसीब तुझ को छू रहे हैं हम
Siddharth Saaz
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तुझे करनी है तो मुसावात कर कि बेहतर हमारे भी हालात कर मिटा दिल में बनते ये सहराओं को ख़ुदा अपने बंदों पे बरसात कर
Siddharth Saaz
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