मुझ सेे हर शख़्स रूठ जाता है मेरा होना भी मसअला है इक
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शायद मुझे किसी से मोहब्बत नहीं हुई लेकिन यक़ीन सब को दिलाता रहा हूँ मैं
Jaun Elia
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बिछड़ कर उस का दिल लग भी गया तो क्या लगेगा वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या ना आऊँ मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हें अच्छा लगेगा
Tehzeeb Hafi
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माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूँ मैं तू मेरा शौक़ देख मिरा इंतिज़ार देख
Allama Iqbal
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मुझ से मत पूछो के उस शख़्स में क्या अच्छा है अच्छे अच्छों से मुझे मेरा बुरा अच्छा है किस तरह मुझ से मुहब्बत में कोई जीत गया ये न कह देना के बिस्तर में बड़ा अच्छा है
Tehzeeb Hafi
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ये दुख अलग है कि उस सेे मैं दूर हो रहा हूँ ये ग़म जुदा है वो ख़ुद मुझे दूर कर रहा है तेरे बिछड़ने पर लिख रहा हूँ मैं ताज़ा ग़ज़लें ये तेरा ग़म है जो मुझ को मशहूर कर रहा है
Tehzeeb Hafi
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कहानी में तुम्हारे ज़िक्र भर से मेरा किरदार हल्का हो रहा है
Vishal Singh Tabish
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दोस्त मेरा ये मानना है एक एक हम-सब हैं और ख़ुदा है एक मुझ सेे हर शख़्स रुठ जाता है मेरा होना भी मसअला है एक
Vishal Singh Tabish
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वैसे वो इक फूल है मुझ को भाता है पर ग़ुस्से में पत्थर का हो जाता है
Vishal Singh Tabish
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भूल जाना नहीं रहा ताबिश वो दीवाना नहीं रहा ताबिश ज़िंदगी का सुलूक मेरे साथ दोस्ताना नहीं रहा ताबिश हम की हंसते हैं क्योंकि रोने को कोई शाना नहीं रहा ताबिश
Vishal Singh Tabish
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सब की हिम्मत नहीं ज़माने में लोग डरते हैं मुस्कुराने में एक लम्हा भी ख़र्च होता नहीं मेरी ख़ुशियों को आने जाने में
Vishal Singh Tabish
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