मुझ सेे मिली तो सारा गुमाँ ख़ाक हो गया जलते रहे चराग़ हवा कुछ न कर सकी
Related Sher
कोई इतना प्यारा कैसे हो सकता है फिर सारे का सारा कैसे हो सकता है तुझ सेे जब मिल कर भी उदासी कम नहीं होती तेरे बग़ैर गुज़ारा कैसे हो सकता है
Jawwad Sheikh
163 likes
कुछ न कुछ बोलते रहो हम सेे चुप रहोगे तो लोग सुन लेंगे
Fahmi Badayuni
112 likes
वो मुझ को छोड़ के जिस आदमी के पास गया बराबरी का भी होता तो सब्र आ जाता
Parveen Shakir
107 likes
कोरे काग़ज़ पर रो रहे हो तुम मैं तो समझा पढ़े लिखे हो तुम क्या कहा मुझ सेे दूर जाना है इस का मतलब है जा चुके हो तुम
Zubair Ali Tabish
113 likes
अब मैं सारे जहाँ में हूँ बदनाम अब भी तुम मुझ को जानती हो क्या
Jaun Elia
197 likes
More from Prashant Sitapuri
ये सही है दरमियाँ कुछ भी नहीं अब है हमारे पर मेरी जानिब मुहब्बत को निभाया तो गया है
Prashant Sitapuri
0 likes
तुम्हें कुछ दे नहीं सकता मगर फिर भी फ़कीरी में निकलती है दुआ मुझ सेे
Prashant Sitapuri
0 likes
सब को नीचा ही दिखाना है उसे और कर ही क्या सका है आदमी
Prashant Sitapuri
0 likes
याँ जब भी गुलाबों को मैं हाथ लगाता हूँ क्या जान मिरी वाँ तेरे होंठ लरज़ते हैं
Prashant Sitapuri
0 likes
वबा का दौर है सहमा हुआ है आदमी मौला सभी हैं खो रहे अपने रहम कुछ तो ख़ुदा करिए
Prashant Sitapuri
0 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Prashant Sitapuri.
Similar Moods
More moods that pair well with Prashant Sitapuri's sher.







