मुकम्मल हिज्र में काटी है उस ने ज़िन्दगी अपनी यहाँ कुछ लोग पल भर में मुहब्बत भूल जाते हैं
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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बंसी सब सुर त्यागे है, एक ही सुर में बाजे है हाल न पूछो मोहन का, सब कुछ राधे राधे है
Zubair Ali Tabish
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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मेहरबाँ हम पे हर इक रात हुआ करती थी आँख लगते ही मुलाक़ात हुआ करती थी हिज्र की रात है और आँख में आँसू भी नहीं ऐसे मौसम में तो बरसात हुआ करती थी
Ismail Raaz
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आईने आँख में चुभते थे बिस्तर से बदन कतराता था एक याद बसर करती थी मुझे मैं साँस नहीं ले पाता था
Tehzeeb Hafi
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सर आँखों पर रखते उठा कर तब मुझे सब मंदिर में जलती काठ की गर राख होती
Dr Bhagyashree Joshi
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कुछ होता यूँँ दहलीज़ की मैं ख़ाक होती तो रोज़ तेरे पैर छू कर पाक होती
Dr Bhagyashree Joshi
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गवाही दे रहे हैं आँखों के काले घने घेरे तुम्हारी याद में कल रात भर जागी हुई हूँ मैं
Dr Bhagyashree Joshi
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ज़िन्दगी का कोई पल जब मुझ को बरहम सा लगा दोस्त बन कर तब मेरे तू दिल पे मरहम सा लगा
Dr Bhagyashree Joshi
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सुना है चाँद रात उस के फ़क़त आ जाने से छत पे कई दीवानियों ने ईद का ऐलान कर डाला
Dr Bhagyashree Joshi
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