मुकम्मल हो गई ग़ज़लें हमारी वो जब से पढ़ रहे लिक्खा हमारा
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इलाज अपना कराते फिर रहे हो जाने किस किस से मोहब्बत कर के देखो ना मोहब्बत क्यूँँ नहीं करते
Farhat Ehsaas
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ज़मीं पे घर बनाया है मगर जन्नत में रहते हैं हमारी ख़ुश-नसीबी है कि हम भारत में रहते हैं
Mehshar Afridi
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दुआ करो कि सलामत रहे मिरी हिम्मत ये इक चराग़ कई आँधियों पे भारी है
Waseem Barelvi
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उस के होंटों पे रख के होंट अपने बात ही हम तमाम कर रहे हैं
Jaun Elia
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मोहब्बत अपनी क़िस्मत में नहीं है इबादत से गुज़ारा कर रहे है
Fahmi Badayuni
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ज़िंदगी को मैं नाश करता हूँ ज़िंदगी मुझ को नाश करती है
Harsh Kumar
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वो हैं महफ़ूज़ जो हैं क़ैद में यारों अगर हम सेे हुए आज़ाद रोयेंगे
Harsh Kumar
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ज़मीं से उस का सौदा हो गया है हमारा बीज पौधा हो गया है
Harsh Kumar
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तिरा मिलना है जैसे डूबते को कोई तिनका सहारा हो गया है
Harsh Kumar
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निकल आई हो तुम उस चाँद जैसे न जाने कितनों की अब रात होगी
Harsh Kumar
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