वो हैं महफ़ूज़ जो हैं क़ैद में यारों अगर हम सेे हुए आज़ाद रोयेंगे
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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ज़िंदगी को मैं नाश करता हूँ ज़िंदगी मुझ को नाश करती है
Harsh Kumar
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यारों उस की ख़ुशी के लिए मर जाना ही बेहतर था
Harsh Kumar
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ज़मीं से उस का सौदा हो गया है हमारा बीज पौधा हो गया है
Harsh Kumar
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मुकम्मल हो गई ग़ज़लें हमारी वो जब से पढ़ रहे लिक्खा हमारा
Harsh Kumar
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क्या थे क्या हो गए हो मियाँ अपनी हालत पे हैरत करो
Harsh Kumar
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