ज़मीं से उस का सौदा हो गया है हमारा बीज पौधा हो गया है
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परों को खोल ज़माना उड़ान देखता है ज़मीं पे बैठ के क्या आसमान देखता है
Shakeel Azmi
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रूठा था मैं बहुत दिनों से मान गया लेकिन कान पकड़ कर जब वो बोली सोरी-वोरी सब
Sandeep Thakur
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ज़िक्र हर-सू बिखर गया उस का कोई दीवाना मर गया उस का उस ने जी भर के मुझ को चाहा था और फिर जी ही भर गया उस का
Zubair Ali Tabish
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तपते सहराओं में सब के सर पे आँचल हो गया उस ने ज़ुल्फ़ें खोल दीं और मसअला हल हो गया
Tehzeeb Hafi
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मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना हिन्दी हैं हम वतन है हिन्दोस्ताँ हमारा
Allama Iqbal
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यारों उस की ख़ुशी के लिए मर जाना ही बेहतर था
Harsh Kumar
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ज़िंदगी को मैं नाश करता हूँ ज़िंदगी मुझ को नाश करती है
Harsh Kumar
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वो हैं महफ़ूज़ जो हैं क़ैद में यारों अगर हम सेे हुए आज़ाद रोयेंगे
Harsh Kumar
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तिरा मिलना है जैसे डूबते को कोई तिनका सहारा हो गया है
Harsh Kumar
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अच्छे लोगों से जाना है बहुत बुरा है अच्छा होना
Harsh Kumar
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