न हाथ आगे करूँँ सामने सिवाए तेरे न इतना देना कि मुझ को ग़ुरूर आ जाए
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गले मिलना न मिलना तो तेरी मर्ज़ी है लेकिन तेरे चेहरे से लगता है तेरा दिल कर रहा है
Tehzeeb Hafi
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हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
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ये दुख अलग है कि उस सेे मैं दूर हो रहा हूँ ये ग़म जुदा है वो ख़ुद मुझे दूर कर रहा है तेरे बिछड़ने पर लिख रहा हूँ मैं ताज़ा ग़ज़लें ये तेरा ग़म है जो मुझ को मशहूर कर रहा है
Tehzeeb Hafi
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कोई इतना प्यारा कैसे हो सकता है फिर सारे का सारा कैसे हो सकता है तुझ सेे जब मिल कर भी उदासी कम नहीं होती तेरे बग़ैर गुज़ारा कैसे हो सकता है
Jawwad Sheikh
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मत पूछ कि क्या हाल है मेरा तेरे पीछे तू देख कि क्या रंग है तेरा, मेरे आगे
Mirza Ghalib
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अपनी आदत है अगर होना तो बस एक दिल का कहने वाले इसी आदत को वफ़ा कहते हैं
Hasan Raqim
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सोज़-ए-वफ़ा के नाम से अरमान थे बहुत लेकिन दयार -ए-इश्क़ से अंजान थे बहुत लगता था उन्हें इश्क़ की राहें हैं मुनाकिद आ कर के राह-ए-इश्क़ में हैरान थे बहुत
Hasan Raqim
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ब-मंज़िल पर हूँ मगर ये मकाँ मंज़िल नहीं लगता सफ़र को भी मिरा अब कोई मुस्तक़बिल नहीं लगता
Hasan Raqim
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जो लोग वक़्त के चलते यहाँ बदलते नहीं वो गिर के उठते है लेकिन कभी सँभलते नहीं मैं एक तरफ़ा मुहब्बत की क्या मिसालें दूँ ये लोग आग पे चलते हैं और जलते नहीं
Hasan Raqim
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तस्वीर इक जला के बुझाता रहा हूँ मैं उस के ही पास लौट के जाता रहा हूँ मैं ये ना-तमाम ख़्वाब हक़ीक़त हों किस तरह हर पल तो अपनी नींद उड़ाता रहा हूँ मैं
Hasan Raqim
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