न मिली नज़र कभी नज़रों से कभी उस सेे कुछ ही न बात की हूँ उदास फिर भी मैं देख के उसे साथ में किसी और के आज
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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ये दुख अलग है कि उस सेे मैं दूर हो रहा हूँ ये ग़म जुदा है वो ख़ुद मुझे दूर कर रहा है तेरे बिछड़ने पर लिख रहा हूँ मैं ताज़ा ग़ज़लें ये तेरा ग़म है जो मुझ को मशहूर कर रहा है
Tehzeeb Hafi
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बंसी सब सुर त्यागे है, एक ही सुर में बाजे है हाल न पूछो मोहन का, सब कुछ राधे राधे है
Zubair Ali Tabish
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मर चुका है दिल मगर ज़िंदा हूँ मैं ज़हर जैसी कुछ दवाएँ चाहिए पूछते हैं आप आप अच्छे तो हैं जी मैं अच्छा हूँ दुआएँ चाहिए
Jaun Elia
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ये मानो या न मानो तुम मगर सच है यही देखो बिना मेरे तुम्हारा नाम तक पूरा नहीं होता
Rehaan
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थी दिल-लगी की ख़बर हमें भी था इल्म उन को भी आशिक़ी का ये हादसा है कि अपनी-अपनी जगह पे दोनों मुकर गए हैं
Rehaan
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तेरी ही धड़कनों को दिल में जाँ बाशिन्दा रक्खा है बनाया था तेरा जो अक्स वो ताबिन्दा रक्खा है ये ग़म तुझ सेे बिछड़ने का किसी मातम सा लगता है मगर ये ग़म ही है जिस ने कि अब तक ज़िन्दा रक्खा है
Rehaan
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शिकस्त-ए-दिल है ग़म ऐसा कहीं लज़्ज़त नहीं आती मिले कितने भी ता'ने फिर मगर ज़िल्लत नहीं आती गुमाँ है हुस्न पे उस को चढ़ा हमपे ख़ुमार-ए-इश्क़ उसे उल्फ़त नहीं आती हमें ग़ैरत नहीं आती
Rehaan
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ताकि समझे तू भी हिज्र क्या चीज़ है जा रहा हूँ बहुत दूर मैं तुझ सेे अब
Rehaan
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