sherKuch Alfaaz

तेरी ही धड़कनों को दिल में जाँ बाशिन्दा रक्खा है बनाया था तेरा जो अक्स वो ताबिन्दा रक्खा है ये ग़म तुझ सेे बिछड़ने का किसी मातम सा लगता है मगर ये ग़म ही है जिस ने कि अब तक ज़िन्दा रक्खा है

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ये मानो या न मानो तुम मगर सच है यही देखो बिना मेरे तुम्हारा नाम तक पूरा नहीं होता

Rehaan

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क़ुबूल है मुझे इज़हार जो किया उस ने है शर्त बस कि न पूछे अतीत वो मेरा

Rehaan

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थी दिल-लगी की ख़बर हमें भी था इल्म उन को भी आशिक़ी का ये हादसा है कि अपनी-अपनी जगह पे दोनों मुकर गए हैं

Rehaan

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दुआ में तुम जिसे माँगो वही फ़रहाद होना था सनम को रब समझकर इश्क़ में प्रहलाद होना था सरल शब्दों में बोलूँ तो अलग दोनों में था बस ये तुम्हें आबाद दिखना था मुझे बर्बाद होना था

Rehaan

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शिकस्त-ए-दिल है ग़म ऐसा कहीं लज़्ज़त नहीं आती मिले कितने भी ता'ने फिर मगर ज़िल्लत नहीं आती गुमाँ है हुस्न पे उस को चढ़ा हमपे ख़ुमार-ए-इश्क़ उसे उल्फ़त नहीं आती हमें ग़ैरत नहीं आती

Rehaan

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