नबी की पैरवी करते रहेंगे हम अपनी जान की बाज़ी लगा कर
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हम अपनी जान के दुश्मन को अपनी जान कहते हैं मोहब्बत की इसी मिट्टी को हिंदुस्तान कहते हैं
Rahat Indori
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हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा
Allama Iqbal
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कोई शहर था जिस की एक गली मेरी हर आहट पहचानती थी मेरे नाम का इक दरवाज़ा था इक खिड़की मुझ को जानती थी
Ali Zaryoun
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क्या ग़लत-फ़हमी में रह जाने का सदमा कुछ नहीं वो मुझे समझा तो सकता था कि ऐसा कुछ नहीं इश्क़ से बच कर भी बंदा कुछ नहीं होता मगर ये भी सच है इश्क़ में बंदे का बचता कुछ नहीं
Tehzeeb Hafi
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मैं चूमता हूँ तो वो हाथ खींच लेता है उसे पता है ये सीढ़ी कहाँ पे जानी है
Nadir Ariz
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सुनो मजनूंँ बने फिरते रहोगे यार कब तक तुम हमारा मशवरा है इश्क़ कोई दूसरा कर लो
Faizan Faizi
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ज़माने से उलझना छोड़ दो ऐ हिंद के लोगों हमारा काम तो बस मुल्क को आगे बढ़ाना है
Faizan Faizi
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सुना है चाँद सी काफ़ी हसीं है नहीं देखा मगर ख़ूबी बहुत है नहीं करना किसी से दोस्ती अब हमारे साथ इक सूफी बहुत है
Faizan Faizi
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मौत बस आने तलक तो साथ दो ज़िंदगी मैं ख़ुद जुदा हो जाउँगा
Faizan Faizi
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सभी को एक दिन मरना यहाँ है यही बस सोच कर सब मर रहे हैं
Faizan Faizi
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