नज़दीकी अक्सर दूरी का कारन भी बन जाती है सोच-समझ कर घुलना-मिलना अपने रिश्ते-दारों में
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हिम्मत, ताकत, प्यार, भरोसा जो है सब इनसे ही है कुछ नंबर हैं जिन पर मैं ने अक्सर फोन लगाया है
Pratap Somvanshi
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आप अपने से हम-सुख़न रहना हमनशीं साँस फूल जाती है
Jaun Elia
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शाम ढलने से फ़क़त शाम नहीं ढलती है उम्र ढल जाती है जल्दी पलट आना मेरे दोस्त
Ashfaq Nasir
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उस वक़्त भी अक्सर तुझे हम ढूँढ़ने निकले जिस धूप में मज़दूर भी छत पर नहीं जाते
Munawwar Rana
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किसी से दूरी बनाई किसी के पास रहे हज़ार कोशिशें कर लीं मगर, उदास रहे
Sawan Shukla
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घर में झीने रिश्ते मैं ने लाखों बार उधड़ते देखे चुपके चुपके कर देती है जाने कब तुरपाई अम्मा
Aalok Shrivastav
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अब तो ख़ुद अपने ख़ून ने भी साफ़ कह दिया मैं आप का रहूॅंगा मगर उम्र भर नहीं
Aalok Shrivastav
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ग़नीमत है नगर वालों लुटेरों से लुटे हो तुम हमें तो गांव में अक्सर, दरोगा लूट जाता है
Aalok Shrivastav
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हम उसे आँखों की दहलीज़ न चढ़ने देते नींद आती न अगर ख़्वाब तुम्हारे ले कर एक दिन उस ने मुझे पाक नज़र से चूमा उम्र भर चलना पड़ा मुझ को सहारे ले कर
Aalok Shrivastav
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मैं अपनी दुनिया का ऐसा सूरज हूँ जिस सूरज का गहना मुश्किल होता है
Aalok Shrivastav
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