नस्ल थे हम वो कि जिस ने गाँव तो देखे न थे शहर था इक वो भी अब तो जाँ-सिताँ सा हो गया
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न पूछो हुस्न की ता'रीफ़ हम से मोहब्बत जिस से हो बस वो हसीं है
Adil Farooqui
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अब हवाएँ ही करेंगी रौशनी का फ़ैसला जिस दिए में जान होगी वो दिया रह जाएगा
Mahshar Badayuni
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मत बताना कि बिखर जाएँ तो क्या होता है नईं नस्लों को नए ख़्वाब सजाने देना
Ameer Imam
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मैं क्या बताऊँ वो कितना क़रीब है मेरे मेरा ख़याल भी उस को सुनाई देता है वो जिस ने आँख अता की है देखने के लिए उसी को छोड़ के सब कुछ दिखाई देता है
Zubair Ali Tabish
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ये ज़ुल्फ़ अगर खुल के बिखर जाए तो अच्छा इस रात की तक़दीर सँवर जाए तो अच्छा जिस तरह से थोड़ी सी तेरे साथ कटी है बाक़ी भी उसी तरह गुज़र जाए तो अच्छा
Sahir Ludhianvi
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क्या करोगे बुलाकर ख़ुदा को वहाँ हो ज़रूरत अगर ना-ख़ुदा की जहाँ
Lekhak Suyash
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वादे तकल्लुफ़ होते हैं 'लेखक' कुछ करना तो कोशिश करना तुम
Lekhak Suyash
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पर खोले हैं फ़क़त अभी बहुत उड़ानें बाक़ी हैं
Lekhak Suyash
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ये कार-ए-मुहाल कर लिया है अब ख़ुद को बहाल कर लिया है
Lekhak Suyash
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यूँँ साथ तो न जाने क्या-क्या नहीं चला हमराह पर वही था जो साथ थम सका
Lekhak Suyash
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