नज़ाकत भी गुलों से कम नहीं उस में मगर फिर सख़्त भी इतना कि पूछो मत
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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यार तुझ को ख़ुदा का हवाला न दे ज़हर दे रुख़्सती का पियाला न दे क़ब्र मंज़ूर है तेरे दिल में मगर इस तरह इश्क़ को दिल निकाला न दे
Janib Vishal
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ये जो मैं हूँ तुम्हारा हूँ तुम्हारा बस तुम्हारा ये जो तुम हो जहाँ के हो मगर मेरे नहीं हो
Janib Vishal
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किसी ने जब गए दिन का पता पूछा लगा ऐसा कि कोई हादिसा पूछा हमीं थे राह भटके लोग हैरत है हमीं से मंज़िलों ने रास्ता पूछा
Janib Vishal
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मैं ने कुछ और कहा था तुम कुछ और समझ बैठे या'नी भोपाल कहा था पर इंदौर समझ बैठे
Janib Vishal
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ज़ब्त-ए-औक़ात भी औक़ात में आ जाता है बात उस की हो तो दिल बात में आ जाता है मौसम-ए-गुल भी बहाना है नहीं आने को आने वाला भरी बरसात में आ जाता है
Janib Vishal
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