नज़र आईं न मुझ को वो जब अपने घर के आगे तो धीमी पड़ गई धड़कन मेरी फिर दर के आगे तरस खाकर मेरी हालत पे वो रोती रही पर क़दम अपने बढ़ा पाई न अपने डर के आगे
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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शायद मुझे किसी से मोहब्बत नहीं हुई लेकिन यक़ीन सब को दिलाता रहा हूँ मैं
Jaun Elia
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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बिछड़ कर उस का दिल लग भी गया तो क्या लगेगा वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या ना आऊँ मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हें अच्छा लगेगा
Tehzeeb Hafi
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मुझ से मत पूछो के उस शख़्स में क्या अच्छा है अच्छे अच्छों से मुझे मेरा बुरा अच्छा है किस तरह मुझ से मुहब्बत में कोई जीत गया ये न कह देना के बिस्तर में बड़ा अच्छा है
Tehzeeb Hafi
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यूँँ तेरी याद मुझे कब नहीं आती है मगर ऐसे मौसम में तेरी याद बहुत आती है
Dipendra Singh 'Raaz'
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जिन को पनाह नहीं मिलती है बाँहों में रक़्स किया करते हैं वो सहराओं में
Dipendra Singh 'Raaz'
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दिल मेरा छोड़ आया उस के पास उस से ताख़ीर से मिला था मैं
Dipendra Singh 'Raaz'
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सुनहरे ख़्वाबों से जिस मकाँ को सजाया था हम ने मिल के बरसों हमारे ख़्वाबों के उस मकाँ को लगा दी है आग ख़ुद ही उस ने
Dipendra Singh 'Raaz'
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ज़ख़्म ऐसा दो मुझे अब इश्क़ में, के नील ही पड़ जाए मेरे दिल के अंदर
Dipendra Singh 'Raaz'
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