निगाह-ए-शोख़ का क़ैदी नहीं है कौन यहाँ किसे तमन्ना नहीं फूल चूमने को मिले
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बिछड़ गए तो ये दिल उम्र भर लगेगा नहीं लगेगा लगने लगा है मगर लगेगा नहीं नहीं लगेगा उसे देख कर मगर ख़ुश है मैं ख़ुश नहीं हूँ मगर देख कर लगेगा नहीं
Umair Najmi
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शायद मुझे किसी से मोहब्बत नहीं हुई लेकिन यक़ीन सब को दिलाता रहा हूँ मैं
Jaun Elia
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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मुद्दतें गुज़र गई 'हिसाब' नहीं किया न जाने अब किस के कितने रह गए हम
Kumar Vishwas
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दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है लंबी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है
Faiz Ahmad Faiz
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हम एक रात हुए थे क़रीब और क़रीब फिर उस के बा'द का क़िस्सा गुनाह जैसा है
Aks samastipuri
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हाए क्या बदहवा से लम्हा है तेरे होते हुए भी तन्हा हूँ
Aks samastipuri
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कि जैसे चाँद निकलेगा यहीं से मैं ऐसे एक खिड़की देखता हूँ
Aks samastipuri
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हम हैं शौक़ीन पुरानी ही शराबों के दोस्त हम तो हैं ढलते हुए हुस्न पे मरने वाले
Aks samastipuri
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एक रिश्ता जिसे मैं दे न सका कोई नाम एक रिश्ता जिसे ता-उम्र निभाए रक्खा
Aks samastipuri
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