हम एक रात हुए थे क़रीब और क़रीब फिर उस के बा'द का क़िस्सा गुनाह जैसा है
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किसी गली में किराए पे घर लिया उस ने फिर उस गली में घरों के किराए बढ़ने लगे
Umair Najmi
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हम को दिल से भी निकाला गया फिर शहर से भी हम को पत्थर से भी मारा गया फिर ज़हरस भी
Azm Shakri
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ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
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होश वालों को ख़बर क्या बे-ख़ुदी क्या चीज़ है इश्क़ कीजे फिर समझिए ज़िंदगी क्या चीज़ है
Nida Fazli
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मेहरबाँ हम पे हर इक रात हुआ करती थी आँख लगते ही मुलाक़ात हुआ करती थी हिज्र की रात है और आँख में आँसू भी नहीं ऐसे मौसम में तो बरसात हुआ करती थी
Ismail Raaz
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हाए क्या बदहवा से लम्हा है तेरे होते हुए भी तन्हा हूँ
Aks samastipuri
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कि जैसे चाँद निकलेगा यहीं से मैं ऐसे एक खिड़की देखता हूँ
Aks samastipuri
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निगाह-ए-शोख़ का क़ैदी नहीं है कौन यहाँ किसे तमन्ना नहीं फूल चूमने को मिले
Aks samastipuri
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हम हैं शौक़ीन पुरानी ही शराबों के दोस्त हम तो हैं ढलते हुए हुस्न पे मरने वाले
Aks samastipuri
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एक रिश्ता जिसे मैं दे न सका कोई नाम एक रिश्ता जिसे ता-उम्र निभाए रक्खा
Aks samastipuri
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