nind aaegi bhala kaise use sham ke baad rotiyan bhi na mayassar hon jise kaam ke baad
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दूरी हुई तो उन सेे क़रीब और हम हुए ये कैसे फ़ासले थे जो बढ़ने से कम हुए
Waseem Barelvi
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मैं उस से ये तो नहीं कह रहा जुदा न करे मगर वो कर नहीं सकता तो फिर कहा न करे वो जैसे छोड़ गया था मुझे उसे भी कभी ख़ुदा करे कि कोई छोड़ दे ख़ुदा न करे
Tehzeeb Hafi
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दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है लंबी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है
Faiz Ahmad Faiz
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सर झुकाओगे तो पत्थर देवता हो जाएगा इतना मत चाहो उसे वो बे-वफ़ा हो जाएगा
Bashir Badr
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मुझ ऐसा शख़्स अगर क़हक़हों से भर जाए ये साँस लेती उदासी तो घुट के मर जाए वो मेरे बा'द तरस जाएगा मोहब्बत को उसे ये कहना अगर हो सके तो मर जाए
Rakib Mukhtar
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हर एक शख़्स यहाँ महव-ए-ख़्वाब लगता है किसी ने हम को जगाया नहीं बहुत दिन से
Azhar Iqbal
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हर एक सम्त यहाँ वहशतों का मस्कन है जुनूँ के वास्ते सहरा ओ आशियाना क्या
Azhar Iqbal
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कहीं अबीर की ख़ुश्बू कहीं गुलाल का रंग कहीं पे शर्म से सिमटे हुए जमाल का रंग चले भी आओ भुला कर सभी गिले-शिकवे बरसना चाहिए होली के दिन विसाल का रंग
Azhar Iqbal
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नींद आएगी भला कैसे उसे शाम के बा'द रोटियाँ भी न मुयस्सर हों जिसे काम के बा'द
Azhar Iqbal
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चले भी आओ भुला कर सभी गिले-शिकवे बरसना चाहिए होली के दिन विसाल का रंग
Azhar Iqbal
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