निकाले गए इस के मअ'नी हज़ार अजब चीज़ थी इक मेरी ख़ामुशी
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हम वो हैं जो ख़ुदा को भूल गए तुम मेरी जान किस गुमान में हो
Jaun Elia
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा
Allama Iqbal
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मेरी दुनिया उजड़ गई इस में तुम इसे हादसा समझते हो आख़िरी रास्ता तो बाक़ी है आख़िरी रास्ता समझते हो
Himanshi babra KATIB
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मैं जब मर जाऊँ तो मेरी अलग पहचान लिख देना लहू से मेरी पेशानी पे हिंदुस्तान लिख देना
Rahat Indori
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तेरी वफ़ा में मिली आरज़ू-ए-मौत मुझे जो मौत मिल गई होती तो कोई बात भी थी
Khalilur Rahman Azmi
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सुना रहा हूँ उन्हें झूट-मूट इक क़िस्सा कि एक शख़्स मोहब्बत में कामयाब रहा
Khalilur Rahman Azmi
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कोई वक़्त बतला कि तुझ से मिलूँ मेरी दौड़ती भागती ज़िंदगी
Khalilur Rahman Azmi
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तिरी सदा का है सदियों से इंतिज़ार मुझे मिरे लहू के समुंदर ज़रा पुकार मुझे
Khalilur Rahman Azmi
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दुनिया भर की राम-कहानी किस किस ढंग से कह डाली अपनी कहने जब बैठे तो एक एक लफ़्ज़ पिघलता था
Khalilur Rahman Azmi
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