पा ए उम्मीद प रक्खे हुए सर हैं हम लोग हैं न होने के बराबर ही मगर हैं हम लोग तू ने बरता ही नहीं ठीक से हम को ऐ दोस्त ऐब लगते हैं ब-ज़ाहिर प हुनर हैं हम लोग
Related Sher
कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
521 likes
ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
484 likes
ये शहर-ए-अजनबी में अब किसे जा कर बताएँ हम कहाँ के रहने वाले हैं कहाँ की याद आती है
Ashu Mishra
117 likes
शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
435 likes
मुझ को भी उन्हीं में से कोई एक समझ ले कुछ मसअले होते हैं ना जो हल नहीं होते
Ali Zaryoun
126 likes
More from Abhishek shukla
ये जो हम तख़्लीक़-ए-जहान-ए-नौ में लगे हैं पागल हैं दूर से हम को देखने वाले हाथ बटा हम लोगों का
Abhishek shukla
17 likes
सफ़र के बा'द भी ज़ौक़-ए-सफ़र न रह जाए ख़याल ओ ख़्वाब में अब के भी घर न रह जाए
Abhishek shukla
22 likes
ये जो दुनिया है इसे इतनी इजाज़त कब है हम पे अपनी ही किसी बात का ग़ुस्सा उतरा
Abhishek shukla
20 likes
सहर की आस लगाए हुए हैं वो कि जिन्हें कमान-ए-शब से चले तीर की ख़बर भी नहीं
Abhishek shukla
14 likes
वहाँ पहले ही आवाज़ें बहुत थीं सो मैं ने चुप कराया ख़ामुशी को
Abhishek shukla
33 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Abhishek shukla.
Similar Moods
More moods that pair well with Abhishek shukla's sher.







