ये जो दुनिया है इसे इतनी इजाज़त कब है हम पे अपनी ही किसी बात का ग़ुस्सा उतरा
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हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा
Allama Iqbal
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मिले किसी से गिरे जिस भी जाल पर मेरे दोस्त मैं उस को छोड़ चुका उस के हाल पर मेरे दोस्त ज़मीं पे सबका मुक़द्दर तो मेरे जैसा नहीं किसी के साथ तो होगा वो कॉल पर मेरे दोस्त
Ali Zaryoun
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हम अपनी जान के दुश्मन को अपनी जान कहते हैं मोहब्बत की इसी मिट्टी को हिंदुस्तान कहते हैं
Rahat Indori
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मैं अगर अपनी जवानी के सुना दूँ क़िस्से ये जो लौंडे हैं मेरे पाँव दबाने लग जाए
Mehshar Afridi
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सभी का ख़ून है शामिल यहाँ की मिट्टी में किसी के बाप का हिन्दुस्तान थोड़ी है
Rahat Indori
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सहर की आस लगाए हुए हैं वो कि जिन्हें कमान-ए-शब से चले तीर की ख़बर भी नहीं
Abhishek shukla
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ये आग वाग का दरिया तो खेल था हम को जो सच कहें तो बड़ा इम्तिहान आँसू हैं
Abhishek shukla
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ये इम्तियाज़ ज़रूरी है अब इबादत में वही दुआ जो नज़र कर रही है लब भी करें
Abhishek shukla
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मैं अपने चारों तरफ़ हूँ और इस तरह का हुजूम अजीब किस्म की तन्हाई साथ लाता है
Abhishek shukla
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शब भर इक आवाज़ बनाई सुब्ह हुई तो चीख़ पड़े रोज़ का इक मामूल है अब तो ख़्वाब-ज़दा हम लोगों का
Abhishek shukla
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