ये आग वाग का दरिया तो खेल था हम को जो सच कहें तो बड़ा इम्तिहान आँसू हैं
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इक रोज़ खेल खेल में हम उस के हो गए और फिर तमाम उम्र किसी के नहीं हुए
Vipul Kumar
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चाँद चेहरा ज़ुल्फ़ दरिया बात ख़ुशबू दिल चमन इक तुम्हें दे कर ख़ुदा ने दे दिया क्या क्या मुझे
Bashir Badr
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कोई समुन्दर, कोई नदी होती, कोई दरिया होता हम जितने प्यासे थे हमारा एक गिलास से क्या होता?
Tehzeeb Hafi
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मेरे दिल के किसी कोने में इक मासूम सा बच्चा बड़ों की देख कर दुनिया बड़ा होने से डरता है
Rajesh Reddy
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खेल ज़िंदगी के तुम खेलते रहो यारो हार जीत कोई भी आख़िरी नहीं होती
Hastimal Hasti
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ये जो दुनिया है इसे इतनी इजाज़त कब है हम पे अपनी ही किसी बात का ग़ुस्सा उतरा
Abhishek shukla
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मैं अपने चारों तरफ़ हूँ और इस तरह का हुजूम अजीब किस्म की तन्हाई साथ लाता है
Abhishek shukla
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शब भर इक आवाज़ बनाई सुब्ह हुई तो चीख़ पड़े रोज़ का इक मामूल है अब तो ख़्वाब-ज़दा हम लोगों का
Abhishek shukla
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ये जो हम तख़्लीक़-ए-जहान-ए-नौ में लगे हैं पागल हैं दूर से हम को देखने वाले हाथ बटा हम लोगों का
Abhishek shukla
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पा ए उम्मीद प रक्खे हुए सर हैं हम लोग हैं न होने के बराबर ही मगर हैं हम लोग तू ने बरता ही नहीं ठीक से हम को ऐ दोस्त ऐब लगते हैं ब-ज़ाहिर प हुनर हैं हम लोग
Abhishek shukla
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