पहले दरवाजा खटकाया जाता था अब तो पहले फ़ोन मिलाया जाता है
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लिपट जाता हूँ माँ से और मौसी मुस्कुराती है मैं उर्दू में ग़ज़ल कहता हूँ हिंदी मुस्कुराती है
Munawwar Rana
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अब लगता है ठीक कहा था 'ग़ालिब' ने बढ़ते बढ़ते दर्द दवा हो जाता है
Madan Mohan Danish
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अब मिरा ध्यान कहीं और चला जाता है अब कोई फ़िल्म मुकम्मल नहीं देखी जाती
Jawwad Sheikh
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तरीक़े और भी हैं इस तरह परखा नहीं जाता चराग़ों को हवा के सामने रक्खा नहीं जाता मोहब्बत फ़ैसला करती है पहले चंद लम्हों में जहाँ पर इश्क़ होता है वहाँ सोचा नहीं जाता
Abrar Kashif
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मुझ सेे हर शख़्स रूठ जाता है मेरा होना भी मसअला है इक
Vishal Singh Tabish
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जिन हाथों से हो कश्मीर बनाते तुम काश उसी से हर तक़दीर बनाते तुम
Shobhit Dixit
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पापा का वो हल्का वाला कुर्ता पहना कंधे पे कुछ भारी भारी सा लगता है
Shobhit Dixit
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साँप को अपना बनाया जा रहा है आस्तीनों में बसाया जा रहा है
Shobhit Dixit
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काग़ज़ की नाव बनाते थे और उस पर भी इतराते थे अब तो छुट्टी भर है बस तब दीवाली यार मनाते थे
Shobhit Dixit
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हर सफ़र में ख़ूबसूरती को चाहिए कुछ हसीन लोग और प्यारे रास्ते
Shobhit Dixit
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