पहले ही मिसरे में आप याद आ गए और ग़ज़ल ये धरी की धरी रह गई
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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हम वो हैं जो ख़ुदा को भूल गए तुम मेरी जान किस गुमान में हो
Jaun Elia
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बिछड़ कर उस का दिल लग भी गया तो क्या लगेगा वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या ना आऊँ मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हें अच्छा लगेगा
Tehzeeb Hafi
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ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
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तुझे देखना है क़रीब से तू जो पास आ के यूँँ बैठ जा तिरे होंठ सुर्ख़ गुलाब हैं तो गुलाब को अभी चूम लूँ
Sachin Sharma
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जो हम शे'र कह कर चले जाएँगें तो पढ़ोगे मिटाने की कोशिश करोगे
Sachin Sharma
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रोज़ बदलता है स्टोरी अपनी वो हर तस्वीर हिफ़ाज़त से रक्खी है
Sachin Sharma
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सबकी ये नज़रें हैं हमारी ही तरफ़ क्यूँँ देखते हो इतनी हैरानी से आप
Sachin Sharma
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शब्दों को जोड़ कर के मिसरा बनाता हूँ मैं ऊँचे पहाड़ों को भी तिनका बनाता हूँ मैं इंजीनियर को आता है काम ये भी करना तिरछी डगर पे सीधा रस्ता बनाता हूँ मैं
Sachin Sharma
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