पहले रोने की आदत थी खूब अब तो हम थक के सो जाते हैं
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हम वो हैं जो ख़ुदा को भूल गए तुम मेरी जान किस गुमान में हो
Jaun Elia
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
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ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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याद से तेरी यही बस इल्तिजा है ये दिसम्बर भी गुज़र जाए किसी तरह
Sayeed Khan
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सभी कुछ मैं हासिल किया हूँ दुआ से तुम्हें एक दिन माँग लूँगा ख़ुदा से
Sayeed Khan
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रहेगा हमेशा ही ये धूप का साथ है जब आरज़ू ही नहीं छाँव मुझ को जहाँ बस हो रोने की आवाज़ और दुख वहीं खींच ले जाता है पाँव मुझ को
Sayeed Khan
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शायद ही कोई रोए मेरी मौत पर सईद सब को बहुत रुलाया है मेरी हयात ने
Sayeed Khan
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मेरे ग़म को समझे दुनिया इस लिए मैं जी रहा हूँ
Sayeed Khan
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