मेरे ग़म को समझे दुनिया इस लिए मैं जी रहा हूँ
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बिछड़ गए तो ये दिल उम्र भर लगेगा नहीं लगेगा लगने लगा है मगर लगेगा नहीं नहीं लगेगा उसे देख कर मगर ख़ुश है मैं ख़ुश नहीं हूँ मगर देख कर लगेगा नहीं
Umair Najmi
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूँ मैं तू मेरा शौक़ देख मिरा इंतिज़ार देख
Allama Iqbal
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शायद ही कोई रोए मेरी मौत पर सईद सब को बहुत रुलाया है मेरी हयात ने
Sayeed Khan
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उस को इज़्ज़त के ख़ौफ़ ने रोका वरना वो भाग जाती मेरे साथ
Sayeed Khan
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वफ़ा की रखे कोई उम्मीद भी क्यूँँ हवा हर नदी का बदन चूमती है
Sayeed Khan
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याद से तेरी यही बस इल्तिजा है ये दिसम्बर भी गुज़र जाए किसी तरह
Sayeed Khan
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उस की आँचल में बिखर जाते हैं तारें जब सँवरती है वो मेरे ख़्वाबों जैसी
Sayeed Khan
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