उस को इज़्ज़त के ख़ौफ़ ने रोका वरना वो भाग जाती मेरे साथ
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हार हो जाती है जब मान लिया जाता है जीत तब होती है जब ठान लिया जाता है
Shakeel Azmi
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तुम्हें इक मश्वरा दूँ सादगी से कह दो दिल की बात बहुत तैयारियाँ करने में गाड़ी छूट जाती है
Zubair Ali Tabish
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यूँ तो हर शाम उमीदों में गुज़र जाती है आज कुछ बात है जो शाम पे रोना आया
Shakeel Badayuni
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अगर तू मुझ सेे शर्माती रहेगी मुहब्बत हाथ से जाती रहेगी
Tehzeeb Hafi
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मुफ़लिसी थी और हम थे घर के इकलौते चराग़ वरना ऐसी रौशनी करते कि दुनिया देखती
Kashif Sayyed
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शायद ही कोई रोए मेरी मौत पर सईद सब को बहुत रुलाया है मेरी हयात ने
Sayeed Khan
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याद से तेरी यही बस इल्तिजा है ये दिसम्बर भी गुज़र जाए किसी तरह
Sayeed Khan
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सभी कुछ मैं हासिल किया हूँ दुआ से तुम्हें एक दिन माँग लूँगा ख़ुदा से
Sayeed Khan
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उस की आँचल में बिखर जाते हैं तारें जब सँवरती है वो मेरे ख़्वाबों जैसी
Sayeed Khan
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मौत के दस्तरस में हैं कब से ज़िंदगी कटती है नहीं सब से
Sayeed Khan
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