मौत के दस्तरस में हैं कब से ज़िंदगी कटती है नहीं सब से
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हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा
Bashir Badr
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जो ख़ानदानी रईस हैं वो मिज़ाज रखते हैं नर्म अपना तुम्हारा लहजा बता रहा है, तुम्हारी दौलत नई नई है
Shabeena Adeeb
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
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बंसी सब सुर त्यागे है, एक ही सुर में बाजे है हाल न पूछो मोहन का, सब कुछ राधे राधे है
Zubair Ali Tabish
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याद से तेरी यही बस इल्तिजा है ये दिसम्बर भी गुज़र जाए किसी तरह
Sayeed Khan
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वफ़ा की रखे कोई उम्मीद भी क्यूँँ हवा हर नदी का बदन चूमती है
Sayeed Khan
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मैं बहुत ख़ुश था फिर ख़बर आई लाश दरिया में से उभर आई
Sayeed Khan
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किसी की आँख दिल में है किसी की सादगी है मिरे इस दर्द-ए-दिल की बस वजह आवारगी है
Sayeed Khan
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पहले रोने की आदत थी खूब अब तो हम थक के सो जाते हैं
Sayeed Khan
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