याद से तेरी यही बस इल्तिजा है ये दिसम्बर भी गुज़र जाए किसी तरह
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चाँदी सोना एक तरफ़ तेरा होना एक तरफ़ एक तरफ़ तेरी आँखें जादू टोना एक तरफ़
Gyan Prakash Akul
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
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गले मिलना न मिलना तो तेरी मर्ज़ी है लेकिन तेरे चेहरे से लगता है तेरा दिल कर रहा है
Tehzeeb Hafi
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माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूँ मैं तू मेरा शौक़ देख मिरा इंतिज़ार देख
Allama Iqbal
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शायद ही कोई रोए मेरी मौत पर सईद सब को बहुत रुलाया है मेरी हयात ने
Sayeed Khan
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शुक्र है अल्लाह का जो आ गया सब्र वरना इक दिन तर्क हम इस्लाम करते
Sayeed Khan
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वफ़ा की रखे कोई उम्मीद भी क्यूँँ हवा हर नदी का बदन चूमती है
Sayeed Khan
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मैं बहुत ख़ुश था फिर ख़बर आई लाश दरिया में से उभर आई
Sayeed Khan
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पहले रोने की आदत थी खूब अब तो हम थक के सो जाते हैं
Sayeed Khan
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