शुक्र है अल्लाह का जो आ गया सब्र वरना इक दिन तर्क हम इस्लाम करते
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किताब फ़िल्म सफ़र इश्क़ शा'इरी औरत कहाँ कहाँ न गया ख़ुद को ढूँढ़ता हुआ मैं
Jawwad Sheikh
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एक दिन की ख़ुराक है मेरी आप के हैं जो पूरे साल के दुख
Varun Anand
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प्यास अगर मेरी बुझा दे तो मैं जानू वरना तू समुंदर है तो होगा मेरे किस काम का है
Rahat Indori
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मुद्दतों बा'द इक शख़्स से मिलने के लिए आइना देखा गया, बाल सँवारे गए
Jaun Elia
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गुलाब ख़्वाब दवा ज़हर जाम क्या क्या है मैं आ गया हूँ बता इंतिज़ाम क्या क्या है
Rahat Indori
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पहले रोने की आदत थी खूब अब तो हम थक के सो जाते हैं
Sayeed Khan
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याद से तेरी यही बस इल्तिजा है ये दिसम्बर भी गुज़र जाए किसी तरह
Sayeed Khan
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मेरे ग़म को समझे दुनिया इस लिए मैं जी रहा हूँ
Sayeed Khan
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इस सेे बुरा भी क्या है किसी शख़्स के लिए वो मर भी जाए और सभी खु़श रहें सईद
Sayeed Khan
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शायद ही कोई रोए मेरी मौत पर सईद सब को बहुत रुलाया है मेरी हयात ने
Sayeed Khan
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