sherKuch Alfaaz

पहले सर की ये शिकायत थी फ़लक ऊँचा है अब मिरे पाँव ये कहते हैं कि धरती है कहाँ

Rauf Raza27 Likes

Related Sher

उस ने देखा मुझ को तो कुण्डी लगानी छोड़ दी फिर मिरे होंठों पे इक आधी कहानी छोड़ दी मैं छुपाए फिर रहा था इश्क़ अपने गाँव में और फिर ज़ालिम ने गर्दन पे निशानी छोड़ दी

nakul kumar

67 likes

मैं अगर अपनी जवानी के सुना दूँ क़िस्से ये जो लौंडे हैं मेरे पाँव दबाने लग जाए

Mehshar Afridi

136 likes

तरीक़े और भी हैं इस तरह परखा नहीं जाता चराग़ों को हवा के सामने रक्खा नहीं जाता मोहब्बत फ़ैसला करती है पहले चंद लम्हों में जहाँ पर इश्क़ होता है वहाँ​ सोचा नहीं जाता

Abrar Kashif

130 likes

जब भी दीवाना कोई राह भटक जाता है सब से पहले तो मेरा आप पे शक जाता है

Vikram Gaur Vairagi

67 likes

ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है

Allama Iqbal

471 likes

Similar Writers

View All ›

Our suggestions based on Rauf Raza.

Similar Moods

View All ›

More moods that pair well with Rauf Raza's sher.