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प्रेम के आसक्त करते वेदना का जाप है हम अभागों पर लगा पीड़ा का कोई श्राप है इस का कोई दुख नहीं है रूष्ट सारे लोग हैं किंतू क्रोधित सब सेे ज़्यादा हम सेे अपना आप है

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हूँ यूँँ टूटा नहीं था जानता मैं मुझे मेरी हँसी से ख़ुश लगा मैं उसे मिलना तो था बेबाक होकर वो आई सामने तो बिछ गया मैं

Aman Mishra 'Anant'

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शौक़ घिनौना है जी उस का प्रेम खिलौना है जी उस का फिर इक बारी मरना होगा कल को गौना है जी उस का

Aman Mishra 'Anant'

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जो अंदर में है जारी जंग हूँ मैं बताऊँ क्या कि कितना तंग हूँ मैं वही तू जो पहनती ही नहीं है उसी बुरक़े का काला रंग हूँ मैं

Aman Mishra 'Anant'

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अपने हाथों को बना पतवार जाते राम का ले नाम दरिया पार जाते हम ने झूठी जीत से ढाढस बढ़ाया मान लेते हार तो फिर हार जाते

Aman Mishra 'Anant'

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बबूलों में किसी उलझे बदन सी होने लगती है जो तेरे बिन कोई छू ले चुभन सी होने लगती है बिना तन्हाई के इक पल रहा जाता नहीं मुझ सेे किसी से बात कर लूँ तो घुटन सी होने लगती है

Aman Mishra 'Anant'

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