फूल से काँटे कोई तो चुनना चाहे कोई हो जो मेरी बातें सुनना चाहे मैं ख़यालों में ही जिस के खो चुका हूँ काश वो भी ख़्वाब मेरे बुनना चाहे
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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पूछते हैं वो कि ग़ालिब कौन है कोई बतलाओ कि हम बतलाएँ क्या
Mirza Ghalib
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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अगर है इश्क़ सच्चा तो निगाहों से बयाँ होगा ज़बाँ से बोलना भी क्या कोई इज़हार होता है
Bhaskar Shukla
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याद है जब कहा करती थी माँ घर आ तेरी मरम्मत करूँँगी
Sahil Verma
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तुम दर्द को भुला दो आँसू चुरा लो उस के शरमाए लाख वो पर तुम तो गले लगाओ
Sahil Verma
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याद बनकर लिखा होता दिल पे जो भी एक आँसू वो सब कुछ मिटा आता है
Sahil Verma
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वो लड़का जो तुम्हें कहीं मिल गया है वही जिस पे तुम्हारा ये दिल गया है सखी वो बहुत अच्छा लड़का है मुझ सेे तभी दूर तुम सेे ये साहिल गया है
Sahil Verma
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वो लोग ही करते हैं शब्दों से हमें घाइल हाथों में कभी जिन के हथियार नहीं दिखते
Sahil Verma
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