पिछले बरस भी बोई थीं लफ़्ज़ों की खेतियाँ अब के बरस भी इस के सिवा कुछ नहीं किया
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जान-लेवा थीं ख़्वाहिशें वर्ना वस्ल से इंतिज़ार अच्छा था
Jaun Elia
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ख़ुश्बू की बरसात नहीं कर पाते हैं हम ख़ुद ही शुरुआत नहीं कर पाते हैं जिस लड़की की बातें करते हैं सब सेे उस लड़की से बात नहीं कर पाते हैं
Gyan Prakash Akul
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तुम्हें लौटा रहा हूँ ख़त तुम्हारे कभी तुम क्या थीं ख़ुद ही देख लेना
Gaurav Trivedi
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आज इक और बरस बीत गया उस के बग़ैर जिस के होते हुए होते थे ज़माने मेरे
Ahmad Faraz
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झेला है मैं ने तीन सौ पैंसठ दुखों का साल चाहो तो पिछले बारह महीनों से पूछ लो
Rehman Faris
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सूरज हूँ ज़िंदगी की रमक़ छोड़ जाऊँगा मैं डूब भी गया तो शफ़क़ छोड़ जाऊँगा
Iqbal Sajid
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मिले मुझे भी अगर कोई शाम फ़ुर्सत की मैं क्या हूँ कौन हूँ सोचूँगा अपने बारे में
Iqbal Sajid
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वो चाँद है तो अक्स भी पानी में आएगा किरदार ख़ुद उभर के कहानी में आएगा
Iqbal Sajid
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मारा किसी ने संग तो ठोकर लगी मुझे देखा तो आसमाँ था ज़मीं पर पड़ा हुआ
Iqbal Sajid
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