पिछले बरस भी हम ने कलाई सजाई थी राखी के धागे आज भी कच्चे नहीं पड़े
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ख़ुश्बू की बरसात नहीं कर पाते हैं हम ख़ुद ही शुरुआत नहीं कर पाते हैं जिस लड़की की बातें करते हैं सब सेे उस लड़की से बात नहीं कर पाते हैं
Gyan Prakash Akul
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दिन में मिल लेते कहीं रात ज़रूरी थी क्या? बेनतीजा ये मुलाक़ात ज़रूरी थी क्या मुझ सेे कहते तो मैं आँखों में बुला लेता तुम्हें भीगने के लिए बरसात ज़रूरी थी क्या
Abrar Kashif
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मुझे शराब पिलाई गई है आँखों से मेरा नशा तो हज़ारों बरस में उतरेगा
Vijendra Singh Parwaaz
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बात ही कब किसी की मानी है अपनी हठ पूरी कर के छोड़ोगी ये कलाई ये जिस्म और ये कमर तुम सुराही ज़रूर तोड़ोगी
Jaun Elia
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बोतलें खोल कर तो पी बरसों आज दिल खोल कर भी पी जाए
Rahat Indori
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यही तो एक तमन्ना है इस मुसाफ़िर की जो तुम नहीं तो सफ़र में तुम्हारा प्यार चले
Aalok Shrivastav
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अब तो ख़ुद अपने ख़ून ने भी साफ़ कह दिया मैं आप का रहूॅंगा मगर उम्र भर नहीं
Aalok Shrivastav
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घर में झीने रिश्ते मैं ने लाखों बार उधड़ते देखे चुपके चुपके कर देती है जाने कब तुरपाई अम्मा
Aalok Shrivastav
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दिलों की बातें दिलों के अंदर ज़रा सी ज़िद से दबी हुई हैं वो सुनना चाहें, ज़बाँ से सब कुछ मैं करना चाहूँ नज़र से बतियां ये इश्क़ क्या है, ये इश्क़ क्या है, ये इश्क़ क्या है, ये इश्क़ क्या है सुलगती सांसें, तरसती आँखें, मचलती रूहें, धड़कती छतियां
Aalok Shrivastav
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बाज़ार जा के ख़ुद का कभी दाम पूछना तुम जैसे हर दुकान में सामान हैं बहुत आवाज़ बर्तनों की घर में दबी रहे बाहर जो सुनने वाले हैं, शैतान हैं बहुत
Aalok Shrivastav
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