आज के कुछ आशिक़ों से मैं ने मिल कर इश्क़ का ये इक नया अंदाज़ जाना इश्क़ का करते रहो दावा सभी से इश्क़ झूठा है या सच्चा मत बताना
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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बंसी सब सुर त्यागे है, एक ही सुर में बाजे है हाल न पूछो मोहन का, सब कुछ राधे राधे है
Zubair Ali Tabish
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ज़िंदगी से चली गई लेकिन वो मेरे ज़ेहन से नहीं जाती
ABhishek Parashar
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तेरे हिस्से का इश्क़ किस को दूँ कौन है फिर तेरे सिवा मेरा
ABhishek Parashar
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ज़हरस इतने तो नहीं मरते लोग मरते हैं जितने तानों से
ABhishek Parashar
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तू नज़्म है आज़ाद है मैं बहर हूँ पाबंद हूँ
ABhishek Parashar
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ये कहानी भी मुकम्मल हो न पाई दोस्तो इस कहानी में भी उस का दिल कोई और ले गया
ABhishek Parashar
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