क़रीबियों से तो गिला मुझे भी है मैं काश बोल पाता आप से भी है अफ़ीम वालों का मैं दुख समझता हूँ कि एक चाय की तो लत मुझे भी है
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तुम पूछो और मैं न बताऊँ ऐसे तो हालात नहीं एक ज़रा सा दिल टूटा है और तो कोई बात नहीं
Qateel Shifai
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अगर है इश्क़ सच्चा तो निगाहों से बयाँ होगा ज़बाँ से बोलना भी क्या कोई इज़हार होता है
Bhaskar Shukla
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निगाहें फेर ली घबरा के मैं ने वो तुम से ख़ूब-सूरत लग रही थी
Fahmi Badayuni
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मैं जब मर जाऊँ तो मेरी अलग पहचान लिख देना लहू से मेरी पेशानी पे हिंदुस्तान लिख देना
Rahat Indori
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माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूँ मैं तू मेरा शौक़ देख मिरा इंतिज़ार देख
Allama Iqbal
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रौनक़ इतनी कर रहे हो घर में क्यूँ क्या तुम आए भी जो जाने के लिए
Vibhu Raj
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जान लो तुम उन की भी मजबूरियाँ देख लो इक रोज़ रह कर पर्दों में
Vibhu Raj
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नहीं के ढेर सारे होते हैं मतलब तसल्ली है मुझे तुम मुस्कुराई हो
Vibhu Raj
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सोलह बरस की मेरी वो महबूब माँ के सामने हँसकर शिकायत कर रही है ख़ूब माँ के सामने
Vibhu Raj
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क्या बताऊँ देखता हूँ मैं तुम्हें अब किस नज़र से आदमी हम सब बने भी हैं तो लेकिन जानवर से
Vibhu Raj
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