रास आई न वो ख़ुशी मुझ को जिस ने हर ग़म को मुझ से दूर किया
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तू मोहब्बत से कोई चाल तो चल हार जाने का हौसला है मुझे
Ahmad Faraz
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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क्या ख़बर कौन था वो, और मेरा क्या लगता था जिस सेे मिल कर मुझे, हर शख़्स बुरा लगता था
Tehzeeb Hafi
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वो अफ़्साना जिसे अंजाम तक लाना न हो मुमकिन उसे इक ख़ूब-सूरत मोड़ दे कर छोड़ना अच्छा
Sahir Ludhianvi
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अब मैं सारे जहाँ में हूँ बदनाम अब भी तुम मुझ को जानती हो क्या
Jaun Elia
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वो मेरे ख़्वाब की दहलीज़ तक तो आया था यहाँ भी वस्ल की सूरत न बनने पाई है
Sumit Panchal
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ये क़ैफियत है कि जब मेरा यार आँख में है गुलों का रंग, फिज़ां की बहार आँख में है
Sumit Panchal
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वा किसी दम मैं अपने लब करता सामने उस के ऐसा कब करता ला दवा था मरज़ मेरा फिर मैं किस से चारागरी तलब करता
Sumit Panchal
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यही सबब है कि हम हिज्र से हैं अफ़्सुर्दा हर एक हिज्र से पैदा विसाल होता नहीं
Sumit Panchal
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करम भी हम पे हुए हैं सितम भी क्या न हुए मगर जो बाब किसी तौर हम पे वा न हुए
Sumit Panchal
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