रात रो रो के गुज़ारी है चराग़ों की तरह तब कहीं हर्फ़ में तासीर नज़र आई है
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मुझ से मत पूछो के उस शख़्स में क्या अच्छा है अच्छे अच्छों से मुझे मेरा बुरा अच्छा है किस तरह मुझ से मुहब्बत में कोई जीत गया ये न कह देना के बिस्तर में बड़ा अच्छा है
Tehzeeb Hafi
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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तुम ने छोड़ा तो किसी और से टकराऊँगा मैं कैसे मुमकिन है कि अंधे का कहीं सर न लगे
Umair Najmi
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वक़्त रहता नहीं कहीं टिक कर आदत इस की भी आदमी सी है
Gulzar
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ये ज़ुल्फ़ अगर खुल के बिखर जाए तो अच्छा इस रात की तक़दीर सँवर जाए तो अच्छा जिस तरह से थोड़ी सी तेरे साथ कटी है बाक़ी भी उसी तरह गुज़र जाए तो अच्छा
Sahir Ludhianvi
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ज़मीन इतनी नहीं है कि पाँव रख पाएँ दिल-ए-ख़राब की ज़िद है कि घर बनाया जाए
Tariq Naeem
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पड़ने लगा था एक ख़लल सा उड़ान में रस्ते से आसमान हटना पड़ा मुझे
Tariq Naeem
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मैं जल्दबाज़ी में ख़ुद ही उठा के ले आया मेरे बदन पे अभी काम होने वाला था
Tariq Naeem
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अब आसमान भी कम पड़ रहे हैं उस के लिए क़दम ज़मीन पे रक्खा था जिस ने डरते हुए
Tariq Naeem
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अजीब दर्द का रिश्ता था सब के सब रोए शजर गिरा तो परिंदे तमाम शब रोए
Tariq Naeem
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