ज़मीन इतनी नहीं है कि पाँव रख पाएँ दिल-ए-ख़राब की ज़िद है कि घर बनाया जाए
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हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
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माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूँ मैं तू मेरा शौक़ देख मिरा इंतिज़ार देख
Allama Iqbal
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आईने आँख में चुभते थे बिस्तर से बदन कतराता था एक याद बसर करती थी मुझे मैं साँस नहीं ले पाता था
Tehzeeb Hafi
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मेरे नाम से क्या मतलब है तुम्हें मिट जाएगा या रह जाता है जब तुम ने ही साथ नहीं रहना फिर पीछे क्या रह जाता है मेरे पास आने तक और किसी की याद उसे खा जाती है वो मुझ तक कम ही पहुँचता है किसी और जगह रह जाता है
Tehzeeb Hafi
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आज का दिन भी ऐश से गुज़रा सर से पाँव तक बदन सलामत है
Jaun Elia
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रात रो रो के गुज़ारी है चराग़ों की तरह तब कहीं हर्फ़ में तासीर नज़र आई है
Tariq Naeem
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पड़ने लगा था एक ख़लल सा उड़ान में रस्ते से आसमान हटना पड़ा मुझे
Tariq Naeem
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अजीब दर्द का रिश्ता था सब के सब रोए शजर गिरा तो परिंदे तमाम शब रोए
Tariq Naeem
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अब आसमान भी कम पड़ रहे हैं उस के लिए क़दम ज़मीन पे रक्खा था जिस ने डरते हुए
Tariq Naeem
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मैं जल्दबाज़ी में ख़ुद ही उठा के ले आया मेरे बदन पे अभी काम होने वाला था
Tariq Naeem
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