रंग और नस्ल ज़ात और मज़हब जो भी है आदमी से कमतर है इस हक़ीक़त को तुम भी मेरी तरह मान जाओ तो कोई बात बने
Related Sher
आदमी देश छोड़े तो छोड़े 'अली' दिल में बसता हुआ घर नहीं छोड़ता एक मैं हूँ कि नींदें नहीं आ रही एक तू है कि बिस्तर नहीं छोड़ता
Ali Zaryoun
124 likes
किसी कली किसी गुल में किसी चमन में नहीं वो रंग है ही नहीं जो तिरे बदन में नहीं
Farhat Ehsaas
59 likes
सखियों संग रँगने की धमकी सुन कर क्या डर जाऊँगा तेरी गली में क्या होगा ये मालूम है पर आऊँगा
Kumar Vishwas
69 likes
कोई तितली निशाने पर नहीं है मैं बस रंगों का पीछा कर रहा हूँ
Zubair Ali Tabish
44 likes
या'नी कि इश्क़ अपना मुकम्मल नहीं हुआ गर मैं तुम्हारे हिज्र में पागल नहीं हुआ वो शख़्स सालों बा'द भी कितना हसीन है वो रंग कैनवस पे कभी डल नहीं हुआ
Kushal Dauneria
64 likes
More from Sahir Ludhianvi
किस दर्जा दिल-शिकन थे मोहब्बत के हादसे हम ज़िंदगी में फिर कोई अरमाँ न कर सके
Sahir Ludhianvi
0 likes
गर ज़िंदगी में मिल गए फिर इत्तिफ़ाक़ से पूछेंगे अपना हाल तिरी बेबसी से हम
Sahir Ludhianvi
26 likes
नाला हूँ मैं बेदारी-ए-एहसास के हाथों दुनिया मिरे अफ़्कार की दुनिया नहीं होती
Sahir Ludhianvi
27 likes
यूँँही दिल ने चाहा था रोना-रुलाना तिरी याद तो बन गई इक बहाना
Sahir Ludhianvi
33 likes
अभी ज़िंदा हूँ लेकिन सोचता रहता हूँ ख़ल्वत में कि अब तक किस तमन्ना के सहारे जी लिया मैं ने
Sahir Ludhianvi
23 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Sahir Ludhianvi.
Similar Moods
More moods that pair well with Sahir Ludhianvi's sher.







