रौशनी चराग़ों से दूर रह नहीं सकती हम-नशीं क़रीबी का शोक सह नहीं सकती
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मेहरबाँ हम पे हर इक रात हुआ करती थी आँख लगते ही मुलाक़ात हुआ करती थी हिज्र की रात है और आँख में आँसू भी नहीं ऐसे मौसम में तो बरसात हुआ करती थी
Ismail Raaz
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दिल से साबित करो कि ज़िंदा हो साँस लेना कोई सुबूत नहीं
Fahmi Badayuni
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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ये दुख अलग है कि उस सेे मैं दूर हो रहा हूँ ये ग़म जुदा है वो ख़ुद मुझे दूर कर रहा है तेरे बिछड़ने पर लिख रहा हूँ मैं ताज़ा ग़ज़लें ये तेरा ग़म है जो मुझ को मशहूर कर रहा है
Tehzeeb Hafi
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तरीक़े और भी हैं इस तरह परखा नहीं जाता चराग़ों को हवा के सामने रक्खा नहीं जाता मोहब्बत फ़ैसला करती है पहले चंद लम्हों में जहाँ पर इश्क़ होता है वहाँ सोचा नहीं जाता
Abrar Kashif
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यूँँ ही ऐसे आ मेरी ज़िंदगी में मुझे ख़बर कोई भी न हो तेरे ही सिवा कोई दूसरा कभी हम-सफ़र कोई भी न हो
Manohar Shimpi
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माँ ब-दौलत रौशनी मुझ को मिली इक नई ही ज़िंदगी मुझ को मिली
Manohar Shimpi
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वहम करना अगर बुराई है तंज कसना कहाँ भलाई है
Manohar Shimpi
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वीरान यारों घर हुआ है अब वहाँ ख़ुशहाल था जर्जर हुआ है अब वहाँ
Manohar Shimpi
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यक़ीं करो दस्तरस हमेशा हर एक को आज़मा रही है ज़मीं से फिर आसमाँ को छूने नया ही आलम बना रही है
Manohar Shimpi
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